इनपुट/आउटपुट स्टोरेज डिवाइसिज़ [Input Output and Secondary Storage Devices ]

 

इनपुट/आउटपुट तथा स्टोरेज डिवाइसिज़ [Input Output and Secondary Storage Devices ]

 इनपुट डिवाइसिज [Input Devices] 


इनपुट डिवाइसिज कम्प्यूटर से जुड़ी वे devices है जो डाटा को प्रविष्ट (enter) कराने के लिए प्रयोग की जाती है।

 इनपुट टेक्स्ट (Text), ग्राडिक्स (Graphics) व ध्वनि (Sound) के रूप में हो सकती है। 

विभिन्न प्रकार की इनपुट के लिए विभिन्न प्रकार की input devices होती है।


 कीबोर्ड [Keyboard]


कीबोर्ड (Keyboard) बहुत लोकप्रिय इनपुट डिवाइस (Input Device) है। Keyboard का प्रारुप टाईपराईटर (typewriter) के जैसा होता है। 

सामान्यतया 'Keyboard' दो आकार का है। 84 Keys या 101/102 keys परन्तु अब 'Window' और 'Internet' के लिये 104 या 108 Keys वाला 'Keyboard' भी उपलब्ध है।

 डाटा (Data) को विभिन्न प्रकार की 'Keys' को दबाकर कम्प्यूटर में प्रविष्ट किया जाता है। 'QWERTY' 'Keyboard' का सबसे अधिक सामान्य प्रारुप है।

 इसे यह नाम इस लिये दिया गया है। क्योकि Q, W, E, R, T, और Y सबसे ऊपर की कतार के वर्ण या अक्षर है।

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 की बोर्ड का प्रारुप [Layout of the Keyboard]

की बोर्ड (Keyboard) के प्रारुप को निम्नलिखित पांच अनुभागों में विभक्त किया जा सकता है:

 1. टाईपिंग कीज (Typing Keys): ये कीबोर्ड की सामान्य कीज है। इनमें अक्षरों (letters) व संख्याओं (Numbers) की कीज शामिल होती है।

2. संख्यात्मक की पैड (Keyboard Keypad): इसका प्रयोग संख्यात्मक डाटा को प्रविष्ट करने के लिये किया जाता है। सामान्तया इस में 17 Keys होती है। इन कीज को कैलक्युलेटर के समान नियोजित किया जाता है।

3. फंक्शन कीज (Function Keys): F1 से लेकर F2 संख्या तक चिन्हित ये keys 'की-बोर्ड' के सबसे ऊपरी भाग में रहती है। इनके द्वारा किए जाने वाला काम प्रयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर पर निर्भर करता है।

4. कंट्रोल कीज (Control Keys): इन कीज से कर्सर (Cursor) और स्क्रीन नियन्त्रण होता है। इसमें चार दिशा निर्देश 'arrow key' भी शामिल है। Home, End, Insert, Delete, Page up. Page down, Control (Ctrl), Alternate (Alt), and Escape (Esc) आदि कीज शामिल है।

5. विशेष उद्देश्य की कीज (Special Purpose keys): की बोर्ड पर कुछ विशेष प्रकार की कीज होती है जैसे कि Enter, Shift, Caps lock, Num lock, Spacebar, Tab altz Print Screen.


पॉटिंग डिवाइसिज [Pointing Devices]

माऊस [Mouse]

माऊस (mouse) सर्वाधिक उपयोग होने वाला कर्सर-कंट्रोल डिवाइस है। माउस (mouse) एक छोटा सा डिब्बा होता है जिसमें नीचे एक गोल बॉल रखी होती है। इसके ऊपर दो या तीन दबाने वाले बटन लगे होते है।

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  माउस (mouse) का प्रयोग कर्सर (Cursor) को स्क्रीन पर आसानी से नियत्रित करने के लिए किया जाता है। जैसे-जैसे माऊस फ्लैट सतह पर घूमता है उसी तरह स्क्रीन पर पॉइंटर (pointer) घूमता है।

 माऊस से टेक्स्ट (Text) डाटा नहीं भेजा जा सकता। इसलिए इसे कीबोर्ड के साथ उपयोग में लाया जाता है।

लाभ:

1. प्रयोग में आसान

2. कम कीमत

3. कर्सर को कीबोर्ड की ऐरों कीज (arrow keys) की तुलना में आसानी और तेजी से मूव किया जा सकता है।

 जॉयस्टिक [Joystick]

ये एक पॉइंटिंग डिवाइस है जो कि मानीटर स्क्रीन (monitor screen) पर कर्सर को मूव करवाता है। ये एक स्टिक से बना होता है जिसमें ऊपर और नीचे दोनों सिरों पर गोल बॉल होती है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। 

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नीचे वाली गोल बॉल सॉकेट (socket) में घूमती है। जॉय स्टिक को सभी चारों दिशाओं में घुमाया जा सकता है। इसका कार्य माऊस से मिलता जुलता है। इसका मुख्य रूप से प्रयोग कम्प्यूटर ऐडेड डिजांइनिग (CAD) और कम्प्यूटर पर गेम (games) खेलने में किया जाता है।

 ट्रैकर बाल [Tracker Ball]

इस इनपुट डिवाइस का मुख्यतः उपयोग लेपटॉप कम्प्यूटर और नोटबुक में माऊस की जगह किया जाता है।

 यह बाल आधी धंसी (inserted) होती है और इस बाल पर उंगलियों को घुमा कर पॉइंटर को मूव किया जाता है।

 इसे कई बार माऊस से बेहतर माना जाता है क्योंकि इसमें हाथ की बाजू को कम घुमाना पड़ता है और इसके लिए कम जगह की आवश्यकता होती है।

लाईट पेन [Light Pen]

लाईट पेन (पैन की तरह) एक पॉइंटिग डिवाइस है जिसकी सहायता से स्क्रीन पर दिखने वाली मेन्यू आईटम (menu item) को स्लेक्ट (select) किया जाता है या पिक्चर बनाई जा सकती है। इसमें एक फोटोशेल (photocell) होता है और एक आप्टीकल प्रणाली (Optical System) जिसे छोटी सी ट्यूब में रखा जाता है।

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 जब इसकी नोक (tip) को मानीटर स्क्रीन पर घुमाया जाता है और पेन का बटन दबाया जाता है तो photocell का sensing तत्व स्क्रीन की उस जगह को भौंपकर (detect) सिग्नल (संकेतों) को CPU को भेज देता है।

आप्टीकल स्कैनर [Optical Scanner]

आप्टीकल मारक रिडर [(OMR) Optical Mark Reader]

ये स्कैनर पैसिल या पेन से बने किसी पूर्व निश्चित तरह के मार्क को पहचानने में सक्षम होते हैं। उदाहरण के रूप में, यदि काफी छाओं ने वस्तुनिष्ठ (objective) तरह का पेपर दिया हो और उन प्रश्नों के उत्तर उन्होंने किसी वर्ग या गोल जगह को पेंसिल से काला करके (अच्छी तरह से भरके) इन उत्तर सीटो (answer sheets) को सीधे कम्प्यूटर में डालकर OMR की सहायता से सीधे ग्रेडिंग की जा सकती है।

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 उदाहरण :

मान लीजिए एक आबजेक्टिव प्रश्न पत्र है और उसके उत्तर पत्र (पुस्तिका) को आप्टीकल मार्क रीहर (OMR) की सहायता से प्रांप्ताक (grade) ज्ञात किया जा सकता है, जिसे नीचे दिया जा रहा है।

प्रश्न Decimal संख्या 7 का बाइनरी equivalent है। (a) 101, (b) 111, (C) 001, (d) 100

आप्टीकल कैरेक्टर रिडर [(OCR) Optical Character Readers]

ये स्कैनर डिवाइस पृष्ठ पर छपे हुए अल्फावेटिक (alphabetic) और न्यूमेरिक (Numeric) अक्षरों को पढ़ने में सक्षम है। ये अक्षर हाथ से लिखे या छपे हुए हो सकते है।

 हाथ से लिखे अक्षरों में सभी अक्षरों का स्टैंडर्ड आकार का होना अनिवार्य है। अक्षरों को बनाने वाली लाइने जुड़ी होनी चाहिए, और कोई स्टालिश (stylish) तरीके से ना लिखे, आदि ऐसी सावधानियों रखनी पड़ती है। 

जबकि दूसरी तरफ यदि ये अक्षर टाईप किए हुए (Type written) है तो ये एक विशिष्ट तरह के font में छपे (Type) हुए होने चाहिए जिन्हें OCR Font कहते है।

 कैरेक्टर (character) को स्कैन करने के बाद मशीन में डले हुए अक्षरों के साथ इस की तुलना की जाती है। जिस पैटर्न (Pattern) के साथ ये मिलता है, उसी अक्षर को (Read) पढ़ लिया समझा जाता है। यदि स्कैन अक्षर किसी भी पैटर्न से मिलान को संतुष्ट नहीं कर पाता, तो उस अक्षर को reject कर दिया जाता है।

बार कोड रिडर [Bar code reader] 

इस उपकरण की सहायता से बार कोड डाटा को पद्म (समझा) जाता है। इस कार्य के लिए लेजर बीम का प्रयोग होता है जो कम्प्यूटर से जुड़ी होती है। लेजर बीम इनपुट डाटा के पैटर्न के ऊपर डाली जाती है ताकि रिकार्ड डाटा को पद्म जा सके।

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बार कोड में सर्वाधिक प्रयोग होने वाले बार कोड को यूनिवर्सल प्रोडक्ट कोड (UPC-universal product code) के नाम से जाना जाता है जो अमरीका के करीबन सभी रिटेल पैकेज पर दिखाई देते है।

 ये बार decode होने पर 10 अंकों में represent किए जाते है। पहले 5 अंक निर्माता या सप्लायर की (उत्पाद के) पहचान के लिए होते है जबकि अगले 5 अंक उस विशिष्ट उत्पाद जो कि निर्माता बेच रहा है, उसकी पहचान के लिए होते है।

लाभ:

1.100% ठीक आउटपुट (accurate)

2. तेज गति (Very fast)

3. कम कीमत (Low cost)

 मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकगनिशन [MICR-Magnetic-ink character recognition]

ये डिवाईस बैंक उद्योग (Bank industry) में प्रोसेस होने वाले प्रतिदिन के ढेर सारे बैंक (cheque) के कार्य में मदद करने के लिए बनाया गया है। MICR यंत्रों का उपयोग करने वाले बैंकों में एक खास तरह का चेक प्रयोग किया जाता है। 

सभी चेको पर बैंक का पहचान कोड और ग्राहक का खाता संख्या (Account no.) एक खास तरह की स्याही से छपा होता है।

 जब भरा हुआ चेक बैंक में दिया जाता है, तो बैंक कर्मचारी को सिर्फ नीचे दाहिनी कोने में लिखी रकम (amount) को encode करना पड़ता है, बाकी चेक की प्रोसेसिंग MICR उपकरण करता है।

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लाभ :

1. उसकी तीव्र गति है।

2. बहुत ही कार्य कुशल (efficient) और समय की बचत करने वाला है।

माइक्रोफोन [Microphone]

यह एक इनपुट उपकरण है जिसके माध्यम से आवाज (sound) को डिजीटल रूप में संग्रहण (store) कर सकते है। इसका प्रयोग कई क्षेत्रों में होता है जैसे मल्टीमीडिया प्रेजेन्टेशन (Multimedia presentation) में आवाज को जोडना, संगीत में मिकसिंग आदि।

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टच स्क्रीन [Touch Screen]

स्पर्श स्क्रीन (touch screen) इनपुट को तभी दर्ज करती है जब कोई अगुंली या दूसरी वस्तु स्क्रीन के सम्पर्क में आती है। सभी इनपुट डिवाइसिज में से टच स्क्रीन सबसे अधिक सरल और सीखने में आसान है। टच स्क्रीन का प्रयोग काफी लम्बे समय से मिलिट्री क्रियाओं में लिया गया है जैसा चित्र में दर्शाया गया है।

'Automated' लाटरी मशीन जिनमें टच स्क्रीन का प्रयोग किया जाता है। वे सुपर मार्किट (Super markets) और परचून स्टोरो में लोकप्रिय बनती जा रही है। आजकल ATM (Automatic Teller Machine) में टव स्क्रीन का प्रयोग किया जाता है।

 टच पैड [Touch Pad]

कुछ कम्प्यूटर पर Pointing device के रुप में एक छोटे संवेदनशील टच पैड का प्रयोग किया जाता है। पैड के साथ-साथ अंगुली या दूसरी वस्तु घुमा कर आप 'Pointer' को 'Display Screen' पर घुमा सकते है। बहुत से उपकरण जैसे कि 'Microwave oven' टच पैड का इस्तेमाल करते है।

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डिजीटल कैमरा [Digital Camera]

डिजिटल कैमरा से हम फोटो लेते हैं, उसे स्टोर करते हैं। फोटोग्राफ (Photograph) डिजिटल फाईल के रूप में कम्प्यूटर में स्टोर हो जाते हैं।

 डिजीटल कैमरा के माध्यम से तेज गति से अच्छी क्वालिटी की फोटो ली जा सकती है। किन्तु यह परम्परागत कैमरे से महंगा होता है। एक वस्तु व व्यक्ति का फोटो कम्प्यूटर में स्टोर है या नहीं यह पता लगाने के लिए हम निम्नलिखित क्रम (Steps) से काम करते है।

(1) व्यक्ति या वस्तु की तस्वीर लेने के लिए डिजिटल कैमरे को उस पर केन्द्रीत किया जाता है।

(ii) डिजिटल कैमरा, डिजिटल फार्म में वस्तु का प्रतिबिम्व (Image) बनाना है ताकि कम्प्यूटर द्वारा इसे स्टोर किया जा सके।

(ii) कम्प्यूटर के प्रतिबिम्ब हैयबैस (Image Database) में उसी प्रकार के पहले से स्टोर किये गये प्रतिविम्व (Image) को मिलाया जाता है।

(iv) इस बात का पता लगाने पर कि मिलान (Match) हो गया है या नहीं, कम्प्यूटर उचित कार्य करता है।

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 आउटपुट डिवाइसिज [Output Devices]

आउटपुट डिवाइसिज कम्प्यूटर से डाय को स्वीकार करती है और उसे यूजर (User) के प्रयोग के लिए उपयुक्त रूप से रुपान्तरित करती है। आउटपुट डिवाइसजि दो प्रकार की होती है।

1. Soft Copy Output: वह output जिसे कागज पर नहीं लिया जा सकता उसे Soft copy output कहते है। उदाहरणतयाः मॉनीटर पर दर्शाया गया 'Outpuť ar Voice response system द्वारा बोला गया शब्द Soft copy output है।

लाभ :

1.इसे खोजना आसान है।

2.इसे आसानी से संशोधित (Updated) किया जा सकता है।

3.ई-मेल द्वारा इसे आसानी से भेजा जा सकता है।

4.इसके लिए बहुत कम स्थान की आवश्यकता होती है। एक CD में हजारों डॉक्यूमेंट (documents) आ सकते है।


2. Hard-copy Output: ऐसा output जिसे कागज पर निर्मित किया जा सकता है उसे Hard copy output कहते है। वे स्वभाव में स्थायी है। उदाहरणतयाः प्रिन्टर द्वारा कागज पर निर्मित output, हार्ड कॉपी आउटपुट के उदाहरण है।

लाभ :

1.कम्प्यूटर बन्द न होने पर भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।

2.किसी भी गैर-अधिकारित (Unau honsed) परिवर्तन को आसानी से ढूंढा जा सकता है।

3.कुछ यूजर (users) सूचना को पढ़ना पसन्द करते है।

3.उन व्यक्तियों को भी दिया जा सकता है जिनके पास कम्प्यूटर नहीं है।

 मॉनीटर [Monitor]

मॉनीटर एक आउटपुट डिवाइस है। यह टी.वी. स्क्रीन की तरह होती है। मॉनीटर स्क्रीन (Monitor Screen) दो प्रकार की होती है।

1. कैथोड रे ट्यूब (Cathode Ray tube)

2. फलैट पैनल डिसप्ले (Flat Panel Display)

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मॉनीटर आउटपुट को अक्षरो के रूप में दिखाता है। यह इमेज (चित्र) को छोटे-छोटे बिंदुओं, जिन्हें पिक्सल (Pixel) कहा जाता है, से बनाता है। किसी भी इमेज की स्पष्टता (Resolution) Pixels की संख्या पर निर्भर करता है। आपके मॉनीटर का Resolution कम से कम 1280 x 1024 होना चाहिए।

फ्लैट पैनल डिसप्ले [Flat Panel Display]

'Flat Panel Display' को CRT की तुलना में कम आयतन (volume), कम भार और कम विद्युत की आवश्यकता होती है। आप उन्हें दीवारों पर टांग सकते है।

 Calculator, वीडियों गैम्स, लेपटाप कम्प्यूटर, विज्ञापन बोर्ड और ग्राफिक डिस्पले Flat Panel Display के वर्तमान उपयोग है।

 प्रिंटर (Printer)

ये एक महत्त्वपूर्ण आउटपुट डिवाइस है जिसका प्रयोग सूचना को पेज पर प्रिंट करने के लिए किया जाता है।

 प्रिंटर के प्रकार [Types of Printers]

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प्रिंटर के विभिन्न प्रकारों को चित्र में दिखाया गया है:

इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printers)

ये प्रिंटर अक्षरों को छापने (print) के लिए रिबन और कागज पर प्रहार करते है। इसलिए इन्हें इम्पैक्ट प्रिंटर कहते है। ये दो प्रकार के होते हैं: 1. कैरेक्टर प्रिंटर (Character printers) और, 2. लाईन प्रिंटर (Line Printer)।

नान-इम्पैक्ट प्रिंटर (Non-impact printers)

ये प्रिंटर अक्षरों को छापने के लिए रिबन और पेपर (कामज) पर प्रहार नहीं करते। इसलिए नान-इम्पैक्ट प्रिंटर कहलाते है। 

ये प्रिंटर पूरे कागज को एक ही बार में प्रिंट कर देते है। इसलिए इन्हें पेज प्रिंटर भी कहते है। ये दो तरह के होते हैं: 1. लेजर प्रिंटर (Laser Printers), 2. इंकजेट प्रिंटर (Inkjet Printers)

इम्पैक्ट प्रिंटर [Impact Printers]

Impact printers की विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • प्रतिबिम्ब को निर्मित करने के लिए कागज के साथ भौतिक सम्पर्क होता है।
  • इसकी व्यय कीमत बहुत कम है।
  • कम कीमत होने के कारण योक प्रिंटिंग (bulk printing) में लाभदायक है।
  • वे धूल भरे वातावरण में, अधिक तापमान में भी कार्य कर सकते है।
  • Impact Printers का बहुत शोर होता है।
  • वे यान्त्रिक प्रकृति के कारण धीमे चलते है।

डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर [Dot Matrix Printers]

ये सर्वाधिक प्रयोग होने वाले प्रिंटर के वर्ग में आता है। इसके दो प्रमुख कारण है DMP के प्रिंटिंग विशेषताओं का आसान होना और कम लागत पर उपलब्ध होना।

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इस प्रकार के प्रिंटरों के प्रिंट हैड में 9x7 पिनों के मैट्रिक्स दिये होते है। पेपर को रिबन और हैड के बीच लगाया जाता है। यदि 'A' को प्रिंट करना है, उससे संबंधित पिने कार्य करेंगी और रिबन पर प्रहार करके 'A' को प्रिंट कर देगी।

 इस तरह एक अक्षर प्रिंट होता है परन्तु, हमें पूरी लाईन प्रिंट करनी होती है। इसलिए बफर (अस्थायी स्टोरेज), प्रयोग किया जाता है। एक लाईन से संबंधित सभी अक्षर बफर में संग्रहित होगे और प्रिंटिंग बाये से दाये शुरू करके 1 से 80 वे अक्षर को पेपर पर प्रिंट करेगी।

 एक लाईन प्रिंट करने के बाद कागज carriage के द्वारा ऊपर की तरफ मूव करता है और फिर से 1 से 80 तक प्रिंट करना शुरू कर देता है। इस तरह की प्रिंटिंग में, हमेशा एक ही दिशा यानि बाये से दाये प्रिंटिंग होती है। 

नये प्रिंटर दोनों दिशाओं में प्रिंट कर सकते है। पहली लाईन बफर स्टोरेज की पहली पॉजिशन से शुरु होती है। जैसे ही पहला अक्षर प्रिंट होता है अगली लाईन का 80 वाँ अक्षर भी इसमें स्टोर हो जाता है और इस तरह कार्य होता रहता है।

 (एक) पहली लाईन के प्रिंट होने पर, वापस आते वक्त हैड उन अक्षरों की प्रिंटिंग दायी से बायी दिशा में करता है जिन्हें इसने बफर में 80 वी से पहली जगह में स्टोर किया था। इस तरह ये दोनों दिशाओं में छापता है। सभी आधुनिक डॉट मैट्रिक्स इसी तरह प्रिंट करते है।

DMP हो आकारों में उपलब्ध है 80 कॉलम और 132 कॉलम काफी दुकानदार (vendor) इनकी सप्लाई करते है। इनमें से कुछ प्रमुख कंपनियों के नाम इस प्रकार है- EPSON, WIPRO, TVSE. GODREJ इत्यादि । प्रिंटिंग की गति 200 से 360 cps (अक्षर प्रति बाण) के बीच की होती है। 

लाभ:

  • सस्ता (कम लागत)
  • अधिक प्रयोग
  • दूसरी भाषा के अक्षर भी प्रिंट करना


हानि:

  • कम गति
  • खराब गुणवता (Poor Quality)

 डेजी व्हील [Daisy Wheel]

इसमें अक्षरों वाला एक व्हील होता है। जिसके प्रत्येक खाँचे (Petal) पर एक अक्षर उभरा (Emboss) होता है। डेजी व्हील प्लास्टिक और मैटल से बनी डिस्क होती है। 

जिसके ऊपर असर Outer edges साथ लगे होते हैं। एक अक्षर प्रिंट करने के लिए प्रिंटर डिस्क को पेपर पर अक्षर प्रिंट होने तक घुमाता है। फिर एक हथौडा डिस्क पर मार करता है जिससे अक्षर का Impression पेपर पर आ जाता है।

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लाभ :

  • DMP से अधिक विश्वसनीय
  • बढ़िया क्वालिटी
  • अक्षरो के Fonts को आसानी से बदलना

हानि :

  • DMP से धीमे
  • अधिक शोर
  • DMP से अधिक महंगा

लाईन प्रिंटर [Line Printer]

ऐसे प्रिंटर जो एक साथ पूरी लाइन प्रिंट करते है, लाइन प्रिंटर कहलाते है। ऐसे इम्पैक्ट प्रिंटर का उपयोग, अधिक मात्रा में पेपर प्रिंट के लिए किया जाता है।

 ये काफी तेज गति से यानि 300 से 3000 लाइन प्रति मिनट की गति से प्रिंट करते है। इस वर्ग के दो सर्वाधिक उपयोग में लाए जाने वाले प्रिंटर हैः इम प्रिंटर और चेन प्रिंटर।

ड्रम प्रिंटर [Drum Printer]

इस लाईन प्रिंटर में इम होता है। ड्रम की सतह ट्रैक में बंटी हुई होती है। कुल ट्रैक की संख्या कागज के आकार जितनी होती है यानि यदि कागज की चौडाई 132 अक्षर की है तो ड्रम पर 132 ट्रैक होगी।

 ट्रैक पर अक्षर उभरे (emboss) होते है। कैरेक्टर सेट में सभी संभव अक्षर जोकि प्रिंटर प्रिंट कर सकता है रखे जाते है। मार्किट में विभिन्न (अक्षर समूह) कैरेक्टर सैट उपलब्ध ह 48, 64 और 96 अक्षर समूह इम काफी तीव्र गति से घुमाया जाता है। 

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कागज का ड्रम पर लपेटा जाता है आर हर ट्रैक पर एक हैमर (हथौडे) लगे होते है। पेपर और हैमर के मध्य कार्बन रिबन लगा होता है। यदि ट्रैक पर 'J' प्रिंट करना है तो जैसे ही 'J' उस ट्रैक के हैमर के सामने आएगा, तब वह उसके ऊपर प्रहार करेगा। इस तरह 'J' कागज पर उभर आएगा।

इस तरह एक अक्षर प्रिंट होता है। लेकिन हम प्रिंटर से एक लाईन एक बार में प्रिंट करना चाहते है।

इसलिए बफर का इस्तेमाल करते हैं, ते हैं, जिसकी संग्रहण क्षमता कागज के आकार जितनी होती है। लाईन के सभी अक्षर को बफर में स्टोर किया जाता है, और जैसे ही हैमर के सामने आते है सभी हैमर एक साथ प्रहार करते है। 

ये बहुत जरूरी है कि सभी हैमर एक ही साथ प्रहार करे ताकि एक लाईन प्रिंट हो सके। यदि ऐसा न हो पाये, तो लहरिया (wavy) परिणाम मिल सकते है। 

इम का एक चक्र (rotation) एक लाईन प्रिंट करता है। इम प्रिंटर की गति तेज होती है और ये 300 से 2000 लाईन प्रति मिनट तक है। सभी प्रिंटिंग विशेषताएं (features) इस प्रिंटर में उपलब्ध है।

लाभ:

  • बहुत तेज गति

हानि:

  • काफी खर्चीली (महंगा)
  • अक्षरों की फॉन्ट (fonts) नहीं बदले जा सकते।
  • प्रहार करने की प्रक्रिया में सही टाईम न होना लहरिया प्रिंट देता है।

चेन प्रिंटर [Chain Printer)

ये भी एक तरह के लाईन प्रिंटर है क्योंकि ये अक्षर समूह की चेन का प्रयोग करते हैं इसलिए वेन प्रिंटर कहलाते है। ये 2 चक्रो पर बंधी हुई टेप जैसे होती है। जिसमें अक्षर समूह तीन या चार बार दोहराए होते है। एक स्टैन्डर्ड अक्षर समूह में 48, 64, 96 अक्षर होते है। 

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चेन के अलावा, इस प्रिंटर में चेन के सामने हैमर का सेट इस तरह होता है कि एक स्याही वाला रिबन व पेपर को हैमर व चेन के बीच में रखा जाए। 

चेन तेज गति से घुमती है और अक्षर प्रिंट करने के लिए हम उसी अक्षर का हैमर प्रयोग करते है। 

चेन प्रिंटर की गति ज्यादा होती है ये कोई जरुरी नहीं है कि पूरी cycle के लिए रुका जाए जैसे कि इम प्रिंटर में विशिष्ट अक्षर को प्रिंट करने के लिए हैमर के सामने घुमाकर लाया जाता था। इसकी गति 400 से 3000 लाईन प्रति मिनट होती है।

लाभ :

  • 'Character Fonts' को आसानी से बदला जा सकता है।
  • लहरिया प्रिंट (Wavy Printing) की समस्या नहीं होती क्योंकि चैन स्पाट (horizontally) घूमती है और इम लम्ववत् (vertically) घूमता है।
  • एक ही प्रिंटर से विभिन्न भाषाओं का प्रयोग किया जा सकता है।

हानियां:

  • "Hammer Strike' का समय बहुत दोषग्राही (Critical) है।
  • विभिन्न साईज के प्रिन्ट और ग्राफिक्स को प्रिन्ट करने की इसमें योग्यता नहीं है।
  • संचालन में शोर होता है।

नान इम्पैक्ट प्रिंटर [Non-Impact Printers]

  • "Non-Impact Printer' की विशेषताएँ इस प्रकार है:
  • 'Impact Printer' से तीव्र ।
  • इनको शोर नहीं होता।
  • इनकी उच्च गुणवत्ता (High quality) है।
  • यह उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफिक प्रिंट कर सकता है।
  • बहुत से Fonts और विभिन्न character size प्रिंट कर सकते है।

 लेजर प्रिंटर [Laser Printers]

ये नान इम्पैक्ट पेज प्रिंटर होते हैं। ये लेजर बीम का उपयोग करके अक्षर बनाने वाले बिंदुओं को कागज पर छापते हैं। इसलिए लेजर प्रिंटर कहलाते है।

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प्रिंटिंग का कार्य निम्नलिखित चरणों में पूरा होता है।

चरण 1:

प्रोसेसिंग इकाई से भेजी गई बिटस (Bits) व डाटा लेजर बीम को आन/ऑफ (on/ off) करने के लिए Trigger (ट्रिगर) का कार्य करती है।

चरण 2:

 आउटपुट डिवाइस में एक ड्रम लगा होता है जिसे साफ (clear) करके, उसे पाजीटिव (positive) विद्युत चार्ज प्रदान किया जाता है। 

एक कागज प्रिंट करने के लिए लेजर बीम लेजर से निकल कर ड्रम की सतह आगे और पीछे से स्कैन करती है।

 ड्रम का पाजीटिव इलैक्ट्रिक चार्ज उन्हीं भागों द्वारा संग्रहित (Store) किया जाता है जोकि लेजर बीम के सम्पर्क में आते है।

चरण 3:

लेजर के संपर्क में आए ड्रम के हिस्से स्याही पाउडर को आर्कषित करते है जिसे टोनर कहा जाता है।

चरण 4:

 इस आकर्षित स्याही पाउडर को पेपर (कागज) पर ट्रांसफर किया जाता है।

चरण 5:

स्याही के कण कागज पर स्थायी रूप से जमा हो जाते है।

चरण 6:

ड्रम वापस क्लीनर की तरफ घूम जाती है जहाँ पर रबड़ ब्लेड अधिक स्याही को साफ करते है और ड्रम को अगला कागज प्रिंट छापने के लिए तैयार करते है।

लाभ :

  • उनकी बहुत उच्च गति है।
  • उनकी आऊटपुट बहुत उच्च गुणवत्ता की है।
  • यह गुणवत्ता के अच्छे ग्राफिक प्रदान करते है।
  • बहुत से Fonts और विभिन्न character size प्रिन्ट कर सकते है।

इंकजेट प्रिंटर्स  (InkJet Printers)

ये नान इम्पैक्ट प्रिंटर नई तकनीक पर आधारित है। ये प्रिंटर अक्षरों को प्रिंट करने के लिए स्याही की बूंदे कागज पर स्प्रे (spray) करते है। ये प्रिंटर बढ़िया गुणवत्ता (High Quality) प्रदान करते है।

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 ये कम आवाज करते है क्योंकि इनमें हैमर का प्रयोग नहीं होता और इनमें प्रिंटिंग के विभिन्न तरीके (modes) उपलब्ध है। रंगों की छपाई इसमें संभव है। इस प्रिंटर के कुछ माडल प्रिंटिंग की बहुत सारी (multiple) प्रतिया निकाल सकते है।

लाभ:

  • उच्च क्वालिटी की प्रिंटिंग (High Quality printing)
  • विश्वसनीताका अधिक होना (More reliable)

हानि:

  • मंहगे क्योंकि प्रति पृष्ठ लागत अधिक
  • लेजर प्रिंटर के मुकाबले धीमे

 द्वितीय स्टोरेज डिवाइसिज [Secondary Storage Devices]

आओ हम निम्नलिखित द्वितीय स्टोरेज डिवाइसिज के बारे में चर्चा करें।

(i) मेग्नेटिक टेप (Magnetic Tape)

(ii) मेग्नेटिक डिस्क (Magnetic Disk)

(iii) फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)

(iv) ऑपटिकल डिस्क (Optical Disk)

 मेग्नेटिक टेप [Magnetic Tape]

ये काफी ज्यादा डाटा को स्टोर करने का लोकप्रिय माध्यम है। भेग्नेटिक टेप ओडियों टेप की तरह काफी लंबी टेप होती है। इसका रिबन प्लास्टिक का बना होता है। 

इसकी चौडाई 1½ और लंबाई 2400 फीट होती है। टेप की ऊपरी सतह पर चुबंकीय पदार्थों का लेप होता है। डाटा को मेग्नेटाईज बिट के रूप में स्टोर किया जाता है जोकि स्थायी होती है। 

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टेप में स्टोर डाटा को बार-बार पद्म जा सकता है जैसे कि आडियों टेप को बार-बार सुना जा सकता है। नये डाटा को स्टोर करने के लिए पुराने डाटा को मिटाना (erase) पड़ता है। इस तरह टेप को reuse किया जा सकता है।

मैग्नेटिक टेप ट्रेक्स (tracks) और पेडेन्स (Frames) में बंटी होती है जैसा कि में दिखाया गया है।

ज्यादातर टेप 9-ट्रैक वाली होती है। 7 ट्रेक वाली टेप भी अनाथ है। यानि इसमें 9 कतारे (rows) होती है।

टेप के एक इंच में रिकार्ड कैरेक्टर की संख्या को टेप घनत्व (Tape density) कहा जाता है। Boobpi (बिट प्रति इंच-Bits per inch), 1600bpi और 6250 bpi कुछ प्रचलित टेप घनत्व है।

मेग्नेटिक टेप इकाई की सामान्य खाका चित्र में दिखाई गई है। टेप की इकाई में एक सप्लाई रील होती है जो Read/ write-एसेबली से होकर टेकअप रील तक जाती है। 

टेप वेक्यूम चैंबर से होकर गुजरते है। टेप की ज्यादा लंबाई इसलिए रखी जाती है ताकि जब ये spools एकदम से शुरू या रोके जाए तो टेप को कोई नुकसान न हो।

अगर टेप 7-चैनल की है तो Read/write एसेंबली में 7 Read/write हैड होंगे। इसी तरह अगर 9-चैनल की टेप है तो 9 Read/write हैड होगे यानि प्रत्येक ट्रेक के लिए अलग से हैड होता है।

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डाटा को टेप में ब्लाक (Block) के रूप में स्टोर किया जाता है जैसा कि में दिखाया गया है। एक ब्लाक को रीड करते वक्त टेप समान गति से चलती रहती है। डाटा की प्रोसेसिग करते वक्त टेप से हटा रीड नहीं करना पड़ता यानि उस वक्त टेप को रूक जाना चाहिए। 

लेकिन एक निश्चित गति से चलती टेप एकदम से नहीं रूक पाती। इसी तरह यदि टेप रुकी हुई है तो एकदम से डाटा को पढ़ने के लिए चल नहीं सकती। 

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इसलिए टेप में डाटा के दो ब्लाक के बीच में थोडी लंबाई खाली छोड़ी जाती है ताकि निश्चित गति से चलती हुई टेप की गति पहले कम हो जाए और फिर रूक जाए और शुरू होते वक्त पहले गति बढ़े और फिर उसी निश्चित गति तक पहुँच जाए। इस टेप में दो ब्लाक (Block) में छोडी जाने वाली खाली जगह को Inter Block Gap (IBG) कहते है।

मेग्नेटिक टेप के अनुप्रयोग क्षेत्र [Application Area of Megnetic Tapes]

ये टेप निम्नलिखित क्षेत्रों में उपयोगी हैं:

1.Serial या sequential (क्रमवार) प्रोसेसिंग

2. टेप पर बैकअप लेना काफी सस्ता पड़ता है।

3. काफी ज्यादा डाटा को स्टोर करने के लिए उपयुक्त

4.विभिन्न मशीनों के बीच में सूचना के आदान प्रदान के लिए

मेग्नेटिक टेप के लाभ [Advantages of Magnetic Tape]

1.कीमत (Cost): ये डाटा को स्टोर करने के सबसे सस्ता माध्यम में से एक है। इसलिए टेप पर डाटा का बैकअप लिया जाता है।

2. संग्रहण क्षमता ( Storage Capacity) इसकी संग्रहण क्षमता काफी ज्यादा है।

3. रिकार्ड की लंबाई (Any Length Record): ये किसी भी लंबाई के रिकार्ड को स्टोर कर सकता है।

4. दुबारा प्रयोगिक (Reusable): हम किसी जगह से डाटा को मिटा कर उसी जगह दूसरा डाटा स्टोर कर सकते है। इस तरह इसे दूबारा प्रयोग में लाया जा सकता है।

5. वहनीय (Portability): ये आसानी से वहनीय है।

 मेग्नेटिक टेप से हानियाँ [Disadvantages of Magnetic Tape]

1. एक्सेस टाईम (Access Time): किसी डाय को एक्सेस करने के लिए उससे पहले स्टोर सारे रिकार्ड को एक्सेस करना पड़ता है। इसलिए टेप में एक्सेस टाईम ज्यादा होता है।

2. लचीलापन (Flexibility): टेप में कम लचीलापन है।

3. स्थांतरण गति (Transmission speed): टेप में डाटा की स्थांतरण की गति कम होती है। 

4. क्षति की संभावना (Vulnerable to Darnage): टेप के पुल या संभालने की लापरवाही की वजह से क्षतिग्रस्त होने की संभावना अधिक होती है।

 मेग्नेटिक डिस्क [Magnetic Disk]

ये एक स्टोरेज डिवाइस है। डिस्क पर दोनों तरफ से मेग्नेटिक (चुंबकीय) तत्व की पतली परत चढ़ी होती है। यह तत्व ० या । हमेशा के लिए स्थायी रूप से संग्रह कर सकता है।

डिस्क को एक के उपर एक रखकर स्टैक (Stack) की तरह डिस्क पैक बनाया जाता है। सामान्यतः इसमें 6 डिस्क होती है।

डिस्क पैक में एक स्पेडल होता है जिसे मोटर से जोड़ा जाता है। ये मोठर बहुत तेज गति करीबन 3600rpm (revolution per minute) चक्र प्रति मिनट की गति से घूमती है। 

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डिस्क पैक की सभी डिस्क साथ-साथ समान गति से एक ही दिशा में (मोटर की गति की दिशा) में घूमती है।

प्रत्येक डिस्क वृर्ताकार ट्रेक (Circular tracks) में बंटी होती है। प्रत्येक ट्रेक (track) भी सेक्टर (sectors) में बंटी हुई होती है। डिस्क पैक की 6 डिस्क में 12 सतह होती है। 

डिस्क पैक की सबसे ऊपर की डिस्क की ऊपरी परत व सबसे नीचे की डिस्क की नीचे की परत को छोड़कर शेष सभी डिस्कों के दोनों ओर सूचनाओं का संग्रह (Store) किया जाता है। यानि 10 परतों का उपयोग संग्रहण के लिए किया जाता है।

डिस्क की क्षमता को मापा जा सकता है। जैसे डिस्क में 10 परत होती है, हर परत में 512 ट्रेक होती है और प्रत्येक ट्रेक में 40 सेक्टर है और प्रत्येक सेक्टर 512 बाइट स्टोर करता है तो कुल संग्रहण क्षमता होगी।

10 X 512 X 40 X 512 बाईट 100 मेगाबाईट

प्रत्येक ट्रेक संबंधित डिस्क पर सिंलेडर बनाते है। यानि सिलेण्डर की संख्या प्रत्येक परत की ट्रेक की संख्या जितनी होगी। डिस्क पैक की हर सतह के ऊपर Read/Write हैड लगा होता है। 

ये हैड एक कंपीनुमा बाजू (comb-like arm) पर लगे होते हैं और सदैव रेडियल की तरह घूमते हैड का प्रयोग डाटा को डिस्क है।

 (अंदर-बाहर की दिशा में) डिस्क ड्राईव में Read/write से पढ़ने और लिखने के लिए किया जाता है। कुछ डिस्क ड्राईव में स्थिर Read/write हैड होते है। 

स्थिर (Fixed) हैड में प्रत्येक ट्रैक का अपना Read/Write हैड होता है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। 

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किसी रिकार्ड को एक्सेस करने में लगने वाले समय Rotational delay होता है। काफी सारे Read/write हैड को प्रयोग होने के कारण और

इसे वायु रहित (air tight) सीलिंग करने के कारण इसे winchester डिस्क कहते है। इस डिस्क की पैकिंग घनत्व बेहतर होता है इसलिए ये अपने आकार से ज्यादा स्टोरेज क्षमता प्रदान करती है। 

चलित हैड (Moving Head) डिस्क ड्राईव में हर परत पर एक Read/Write होता है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। Read/write हैड की बाजू रिकार्डिंग परत (सतह) पर इस तरह आगे-पीछे होती है ताकि किसी भी ट्रैक पर डाटा को पढ़ा या लिखा जा सके। 

सभी Read/write हैड एक साथ घमते है और सभी एक ही vertical plane में समान रूप से ट्रैक पर स्थिर होते रहते है।

2. निम्नलिखित Keys को दबाकर रखो।

  • फाईल को कॉपी (Copy) करने के लिए Ctrl को।
  • फाईल को मूव (Move) करने के लिए Shift को।

3. चयनित फाईल को लक्षित (Destinated) फोल्डर तक Drag करो।

4. माउस को लक्षित (Destinated) फोल्डर पर ले जाओ, माउस बटन को छोड़ दो और फिर Ctrl या shift key को भी छोड़ दो।


टिप्पणीः [Windows Clipboard] The Windows Clipboard is a temporary storage area in the Computer's memory that is used to store the last item cut or copied , when you use the Cut or Copy Commands in any application.


एक फाईल या फोल्डर को रीनेम करना [Rename a File or Folder]

पहली विधि

फाईल या फोल्डर को रीनेम करने के लिए चरण निम्नलिखित है:

1. माई कम्प्यूटर या विंडोज एक्सपलोरर में उस फाईल या फोल्डर पर Click करो जिसे आप Rename करना चाहते हो।

2. फाईल मेन्यू (File Menu) में Rename पर click करो।

3. नया नाम टाईप करो और Enter Key को दबाओ।


दूसरी विधि (शार्टकट मेन्यू का प्रयोग करके)


1. जिस फाईल या फोल्डर को आप Rename करना चाहते हो उसका चयन करो।

2. चयनित फाईल पर Right click करो। शार्टकट मेन्यु दिखाई देगा जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।

3. Rename पर click करो।

4. नया नाम टाईप करो और Enter Key को दबाओ।


 फाईल या फोल्डर को समाप्त करना [Delete Files or Folders]


पहली विधि

फाईल या फोल्डर को समाप्त (Delete) करने के लिए


1. माई कम्प्यूटर या विंडोज एक्सपलोरर में उस फाईल या फोल्डर पर Click करो जिसे आप Delete करना चाहते हो।

2. फाईल मेन्यू में Delete पर click करो।

दूसरी विधि (शार्टकट मेन्यू का प्रयोग करके)

1. जिस फाईल या फोल्डर को आप Delete करना चाहते हो उसका चयन करो।

2. चयनित फाईल पर Right click करो। एक शार्टकट मेन्यू दिखाई देगा।

3. Delete पर click करो।


टिप्पणीः

विंडोज XP में अगर हम फाईल या फोल्डर का चयन माई कम्प्यूटर का प्रयोग करके । करते है तो बाये Panel पर एक फाईल या फोलार Tasks भी दिखाई देता है। हम । फाईल या फोल्डर Tasks का प्रयोग करके विभिन्न फाईल और फोल्डर निर्देशो | (Command) जैसे Move, Copy, Rename, Delete आदि को उपयोग कर । सकते है।


प्रोपर्टी [Properties]

फाईल या फोल्डर Properties को बदलने के लिए

1. माई कम्प्यूटर या विंडोज एक्सपलोरर में उस फाईल या फोल्डर पर Click करो जिसकी Properties को आप बदलना चाहते हो।

2. फाईल मेन्यू में Properties पर click करो।

3. Properties डायलॉग बॉक्स में कुछ बदलाव करो।

4. अन्त में OK पर Click करो।

फोल्डरो का निर्माण करना [Creating Folders]

पहली विधि

फोल्डर का निर्माण करने के लिए चरण (Steps) है:

1. माई कम्प्यूटर या विंडोज एक्सपलोरर को खोलो।

2. उस डिस्क ड्राईव या फोल्डर पर डबल click करो जहा आप एक फोल्डर का निर्माण करना चाहते हो। ड्राईव या फोल्डर विंडो दिखाई देगी।

3. फाईल मेन्यू (File Menu) में, New पर Point करो और फिर Folder पर click करो।

4. फोल्डर का एक नाम टाईप करो और Enter key दबाओ।

नया फोल्डर आपके चयन किए गए स्थान पर दिखाई देगा।

दूसरी विधि

1. उस फोल्डर या डेस्कटॉप के Blank area पर Right click करो। जिसमे आप फोल्डर का निर्माण करना चाहते हो।

2. एक डायलॉग बॉक्स दिखाई देगा जैसा का चित्र  में दर्शाया गया है।

3. पहले New और फिर Folder विकल्प का चुनाव करो।

4. फोल्डर का एक नाम टाईप करो और Enter key दवाओ।

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 फाईलो और फोल्डरो को खोलना [Opening Files and Folders]

जिस फाईल की आप को आवश्यकता है उसे ढूंढने के बाद उसे खोलने के लिए आप उस डबल click कर सकते हो।

1. माई कम्प्यूटर या विंडोज एक्सपलोरर को खोलो।

2. उस ड्राईव पर डबल click करो जिसमे वो फाईल या फोल्डर पड़ी है जिसे आप खोलने चाहते हो।

3. फाईल या फोल्डर को खोलने के उस पर डबल click करो।

 बार-2 प्रयोग होने वाली फाईलो और फोल्डरो के साथ काम करना [Working With Frequently used Files and Folders]

जिस डॉक्यूमेंट या प्रोग्राम को आप अक्सर उपयोग करते हो आप उसे जल्दी से खोल सकते हो। स्टार्ट मेन्यू बार-2 उपयोग होने वाले डॉक्यूमेंट की सूची बना देता है, जिससे आप उन्हे जल्दी से खोल सकते हो। 

अधिक प्रयोग होने वाली फाईल और फोल्डर को Store करने के लिए आपके डेस्कटॉप पर स्थित माई डॉक्यूमेंट फोल्डर एक बहुत ही सुविधाजनक (convenient) स्थान है।

एक फाईल के लिए एक शार्टकट का निर्माण करना [To Create a Shortcut To a File]

ज्यादा प्रयोग होने वाली फाईल पर जल्दी पहुंचने के लिए आप एक शार्टकट का भी निर्माण कर सकते हो। एक शार्टकट Icon फाईल की मौजूदा स्थिति को नही बदलता। 

शार्टकट सिर्फ एक पाइंटर या लिंक है जो आपके लिए फाईल को जल्दी से खोल देता है। यदि आप शार्टकट को समाप्त (Delete) कर देते हो तो वास्तविक फाईल समाप्त (Delete) नहीं होती।

टिप्पणीः

एक फाईल या फोल्डर (या एक एप्लीकेशन) के लिए शार्टकट एक सुविधाजनक स्थान पर (जैसे की डेस्कटॉप) एक लिंक है।

जब आप एक शार्टकट का निर्माण करते हो तो एक शार्टकट Icon स्वयं ही चन जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि आप एक फाईल शार्ट कट का डेस्कटॉप पर निर्माण करते हो, आप फाईल को खोलने के लिए सरलता से शार्टकट icon पर डबल click कर सकते हो।

पहली विधि

डेस्कटॉप पर एक फाईल शार्टकट का निर्माण के लिए चरण (steps) है:

1 उस location को बोलो जहां पर फाईल संग्रहित (stored) है और इच्छित (Desired) फाईल का चयन करो।

2. चयनित फाईल पर Right click करो। एक शार्टकट मेन्यू दिखाई देगा जैसा कि चित्र  में दर्शाया गया है।



3. Sent To विकल्प का चुनाव करो।

4. डेस्कटॉप पर शार्टकट का निर्माण करने के लिए Dekstop (Create Shortcut) पर click करो।

5. डेस्कटॉप पर शार्टकट icon दिखाई देगा। डेस्कटॉप से फाईल को खोलने के लिए शार्टकट icon पर डबल click करो।

दूसरी विधि

एक फाईल शार्टकट का निर्माण करने के लिए चरण है:

1. उस location को खोलो जहां आप शार्टकट का निर्माण करना चाहते हो। यह कोई फोल्डर या डेस्कटॉप हो सकता है।

2. Blank area पर Right click करो।

3. अब, एक pop-up मेन्यू दिखाई देगा। जैसा कि चित्र  में दर्शाया गया है। New का चुनाव करो और Shortcut विकल्प पर click करो।

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4. Create Shortcut डायलॉग बॉक्स दिखाई देगा। जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।

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5. फाईल और फोल्डर का चुनाव करने के लिए ब्राउज बटन पर click करो और। Ok पर click करो।

6. शार्टकट को नाम देने के लिए Next पर click करो। एक नया डायलॉग बॉक्स दिखाई देगा जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।

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7. शार्टकट का नाम लिखो और Finish पर click करो।

8. इच्छित (Desired) location पर शार्टकट Icon दिखाई देगा। शार्टकट Icon को खोलने के लिए उस पर डबल click करो।

फाईल या फोल्डर को खोजना [Searching Files and Folders]

आप अपने कम्प्यूटर या नेटवर्क के किसी कम्प्यूटर से किसी भी तरह की कोई भी फाईल खोज सकते हो। एक विशेष फाईल या फोल्डर को खोजने के चरण (step) निम्नलिखित है :

1. स्टार्ट बटन पर click करो।

2. Search Companion को खोलने के लिए Search पर click करो। जैसा कि चित्र  में दिखाया गया है।

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3. जिसे हम खोजना चाहते है उस तरह की फाईल का चयन करो। उदाहरण के तौर पर डाक्यूमेंट(wordprocessing,spreadsheet etc.) हाईपरलिंक पर click करो। एक नया डायलॉग बॉक्स खुलेगा। जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।

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4. एक फाईल को खोजने के लिए आवश्यक सूचना लिखो। टेक्सट बॉक्स में फाईल का संपूर्ण (full) या आंशिक (partial) नाम टाईप करो। उदाहरण के तौर पर student.doc. टाईप करो।

5. Search बटन पर click करो।

6. विंडो खोज के परिणाम को कन्ट्रोल क्षेत्र (control area) (दाये Pane या search result विंडो की side में) में दिखाएगी। जैसा कि चित्र  में दर्शाया गया है। यह वही फाईल है जिसे हम खोज रहे है।

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7. खोज को समाप्त करने के लिए Yes, finished searching हाइपरलिंक पर click करो।

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