आज अगर सूचनाओं नाओं से भरे हुए इस समाज में प्रभावशाली ढंग से कार्य करना चाहते है तो सभी क्षेत्रों के लोगो को कम्प्यूटर के बारे में जानकारी आवश्यक होनी चाहिए।
इस पाठ का उद्देश्य आपको आज के कम्प्युटर सिस्टम से अवगत कराना है। हमारा उद्देश्य यही रहेगा कि आप कम्प्युटर हार्डवेयर की मूलसरंचना, उसकी क्षमताओं और खामियों को आसानी से समझ सके।
डिजिटल कम्प्यूटर का कार्य [Functioning of A Digital Computer]
किसी कम्प्यूटर की आऊपुट (output) को सूचना (Information) कहा जाता है। इन्फोरमेशन (Information) डाटा की Processed form है।
उदाहरण के लिए किसी छात्र के द्वारा किसी विशेष परीक्षा में अलग-2 विषयों में प्राप्त किए गए अंक डाटा का कार्य करते है। इस डाटा को प्रोसेस (Process) करके परिणाम प्राप्त किया जा सकता है।
परिणाम एक इन्फोरमेशन (Information) है। जिसका प्रयोग अध्यापक यह घोषणा करने के लिये करता है कि छात्र पास है, या फेल।
मूल रूप से डिजिटल कम्प्यूटर पांच कार्य करता है।
(i) इनपुटीग (Inputting): डाटा को Input के रुप में स्वीकार करना।
(ii) संचय करना (Storing): यह डाटा तथा इन्फोरमेशन को मेमोरी (Memory) में स्टोर करता है,तथा जब उसकी आवश्यकता पडती है। उसे रीकाल (recall) करता है।
(iii) प्रोसेसिंग (Processing): दी गई निर्देशो के अनुसार डाटा को प्रोसेस (Process) करके लाभदायक Information में बदलता है।
(iv) आऊटपुटिंग (Outputting): यह तैयार की गई इन्फोरमेशन को आऊटपुट के रुप में दर्शाता है।
(v) नियन्त्रित करना (Controlling): यह ऊपर बताए गए सभी कार्यों को नियन्त्रित भी करता है। सरल शब्दो में हम कम्प्यूटर को इनपुट की सप्लाई करते है। कम्प्यूटर इसको प्रोसेस करता है। और इससे आऊटपुट को तैयार करता है। जैसा के आकृति में दर्शाया गया है।
टिप्पणी: इन्फोरमेशन (Information) डाटा की प्रोसेसड फोर्म है। इसलिए डाटा और इन्फोरमेश एक ही चीज नहीं होती।
कम्प्यूटर की परिभाषा (Computer Definition)
कम्प्यूटर एक ऐसा इलैक्ट्रानिक डाटा प्रोसेसिंग उपकरण है जोकि अपने आप -
(1) सूचना और निर्देश को ग्रहण कर संग्रहित (store) करता है।
(2) उन्हें विश्लेषित (Process) करता है।
(3) विश्लेषित (Process) परिणामों को रिपोर्ट की तरह दिखाता है।
कम्प्यूटर की विशेषताएँ [Characteristics (Advantages) of Computer]
कम्प्यूटर की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है -
(1) तेज गति (High Speed): कम्प्यूटर एक तेज गति की मशीन है जो कि गणितीय गणना अविश्वसनीय गति से कर सकता है। कम्प्यूटर की गति को माइक्रो सेकेंड (Microsecond) (एक क्षण का एक अरबंवा हिस्सा) नैनोंसेकेंड (Nanosecond) (हजार अरबौं) और पीकोसेकेंड (Picosecond) (अरब अस्बंवा हिस्से) में मापा जाता है।
एक शक्तिशाली कम्प्यूटर दो 18 अंको वाली संख्याओं को जोडने में 300 से 400 नैनोसेकेंड लेता है। (यानी प्रति सेकेंड में 3 अरब गणनाएँ करता है)
(2) शुद्धता (Accuracy): कम्प्यूटर विश्लेषण (Processing) में कभी गलती नहीं करते। आज कल कम्प्यूटर दशमलव के बाद आठ या इससे ज्यादा महत्वपूर्ण (Significant) अंको तक गणना करके आवश्यक सही परिणाम देने में सक्षम है।
(3) संग्रहण (Storage) : कम्प्यूटर की आंतरिक मेमोरी इतनी ज्यादा नहीं है कि बार-2 प्रयोग के लिए डाय या निर्देशो को संग्रहित कर सके।
इस कमी को दुर करने के लिए द्वितीयक (Secondary) संग्रह उपकरणो जैसे फ्लापी डिस्क, हार्ड डिस्क, सीडी-रोम आदि का प्रयोग किया गया। इन यंत्रो में डाटा और निर्देशों का संग्रह कर के हम सूचना को बार 2 जब चाहे तब देख सकते है।
(4) विश्वसनीयता (Reliability): कम्प्यूटर एक विश्वसनीय मशीन है। आधुनिक इलेक्ट्रानिक खंड या भाग की उस काफी लंबी और असफलता की दर बहुत कम है।
एक माइक्रोप्रोसेसर चिप की उम्र प्रतिकूल परिस्थितियों के बाबजूद 40 साल तक ही है और इसके असफल होने से पहले इनकी तकनीक लुप्तप्राय (Obsolete) हो जाती है।
(5) विविधता (Versatility): इस मशीन का प्रयोग विभिन्न क्षेत्रो की समस्याओं का हल निकालने में किया जा सकता है।
एक समय पर ये कठिन वैज्ञानिक समस्या का हल निकाल सकता है और दूसरे क्षण में इस पर शतरंज खेली जा सकती है या फिर हो सकता है कि ये पैरोल (Payroll) की समस्या पर कार्य कर रहा हो।
(6) स्वयं चालित (Automation): यदि एक बार प्रोगाम और निर्देशो को कम्प्यूटर की मेमोरी में इनपुट कर दिया जाए तो ये निर्देश अकेले की प्रोगाम को अपने आप चला कर नियंत्रित कर सकते है।
आपरेटर (Operator) जब कम्प्यूटर प्रोगाम या निर्देशो का पालन कर रहा हो तब हस्तक्षेप करने की जरुरत नहीं होती क्योकि निर्देश (Instruction) स्वंय ही समस्या को हल करने में सक्षम होते है
शिक्षा और प्रशिक्षण (Education and Training)
कम्प्यूटर ने शिक्षा प्रणाली में भी बहुत कुछ प्रदान किया है। शिक्षा के क्षेत्र में कम्प्यूटर के प्रयोगो को CBE (कम्प्यूटर आधारित शिक्षा के नाम से जाना जाता है)। CBE में तीन चीजे आती है। नियन्त्रण, प्रचालन तथा मूल्यांकन। कम्प्यूटर का प्रयोग निम्न के लिए किया जाता है।
(1) CMI (कम्प्यूटर मैनेजड इंस्ट्रक्ट): सी. एम. आइ. पैकेज का प्रयोग छात्रों द्वारा ग्रहण की गई निर्देशो को नियन्त्रित करने के लिये किया जाता है।
(II) CAI (कम्प्यूटर एसिस्टिड इन्सट्रकस): इसका प्रयोग छात्रों को Instruction देने के लिए किया जाता है।
(III) शिक्षा में समस्या समाधान सोफ्टवेयर का प्रयोगः ऐसे साफ्टवेयर के उदाहरण है साख्यिकीय पैकेजस, इलैक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट (Spreadsheet), अकाउंटिंग पैकेज आदि।
ऐसे पैकेज में प्रयोगकर्ता डाटा डालता है और सीधा परिणाम प्राप्त करता है।
(iv) सिमुलेशन (Simulation): सिमुलेशन छात्रो को वास्तविक संसार के अनुभवो की योग्यता सीखने की सहायता करता है। उड़ान भरना और उसका संचालन करने से सम्बन्धित सिमुलेशन जो छात्रो को हवाई जहाज उडाना और चलाने की योग्यता सीखने में सहायता करता है।
(v) कम्प्युटर आधारित जांच आजकल छात्रो के प्रदर्शन और विश्लेषण को जाचने के लिए भी सोफ्टवेयर तैयार किये गये है।
5. मार्किटिंग में कम्पयूटर (Computer in Marketing)
मार्किटिंग में कम्पयूटर के प्रयोग के क्षेत्र निम्नलिखित है।
(1) हॉम शापिंग में (At-home shopping) : एट हाम शापिंग कम्प्यूटराइजड सूचियों के प्रयोग के द्वारा ही सम्भव हो पाई है। ये सूचियां उत्पाद सम्बन्धी सूचना देती है तथा व्यापारी द्वारा भरी जाने वाली आर्डर की सीधी एन्टरी प्रदान करती है।
(II) विज्ञापन (Advertising): कम्पयूटरो की सहायता से विज्ञापन बनाने वाले व्यवसायिक आर्ट एवं ग्राफिक्स तैयार करते है, कापी को रिवाइज करते है और वे ज्यादा से ज्यादा सामान बेचने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार के विज्ञापन छापते है।
(iii) टेली मार्किटिंग (Telemarketing): टेली मार्किटिंग का अर्थ है कि उन मार्किटों तक पहुंचाना जहा जाना पहले सम्भव नहीं था। और यह बडा सफल भी सिद्ध हुआ है।
टेली माकिंटिंग से सम्बद्ध लोग शुरु में अपने सम्पर्क बनाने के लिए टेलीफोन या कम्पयूटर का प्रयोग करते है। जब व्यक्ति फोन का जवाब देता है तो पहले से रिकार्ड किए सब्देश प्ले होते है।
व्यक्ति से एक तैयार किए गए प्रश्न पत्र के सवालों का जवाब देने के लिए कहा जा सकता है। या फिर किसी विशेष सेवा पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा जाता है।
6. चिकित्सा एवं स्वास्थय के क्षेत्र (Medicine and Health Care)
कम्प्यूटर चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भाग बन गया है। कुछ प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित है।
(i) डायग्नोस्टिक सिस्टम (Diagnostic System)
इस क्षेत्र में कम्प्यूटर का प्रयोग डाटा इकटठा करने तथा बिमारी के कारणो को जानने के लिए किया जाता है।
(ii) लैब डायग्नोस्टिक सिस्टम (Lab-diagnostic System) :लैब Test कम्प्यूटर की सहायता से ही किया जाता है।
(III) लैब आटोमेशन सिस्टम (Lab-Automation System): इसके द्वारा मेडिकल जांच की जाती है।
(iv) रोगी मोनिटरिंग सिस्टम (Patient Monitoring System): इस का प्रयोग रोगी के असामान्य होने के प्रत्येक चिन्हो को पता लगाने के लिए किया जाता है।
(v) फार्मेसी सूचना प्रक्रिया (Pharmacy Information System): यह ड्रग्स के लेबल, समाप्ति तिथि, हानिकारक प्रभाव इत्यादि का पता लगाने के लिए किया जाता है।
आजकल कम्प्यूटरों का प्रयोग सर्जरी करने के लिए भी किया जाता है।
डिजाइन व मैनफैक्चरिंग में (Design and Manufacturing)
इन्जिनियरिंग उद्देश्यों के लिए भी कम्प्यूटर का प्रयोग काफी मात्रा में किया जाता है। एक प्रमुख क्षेत्र CAD (कम्प्यूटर एडिट डिजाइन) है। CAD का प्रयोग इमेज बनाने तथा, संशोधित करने के लिए करते है। मुख्य क्षेत्र निम्नलिखित है।
(1) स्ट्रक्चरल इन्जिनियरिंग (Structural engineering)
जहाज, इमारत, बजट, हवाई जहाज इत्यादि के निर्माण के लिए डिजाइन कम्प्यूटर की सहायता से तैयार करते है।
(ii) आर्किटेक्चरल इन्जिनियरिंग (Architectural Engineering) टाऊन प्लानिंग के लिए, भवनो का डिजाइन तैयार करने के लिए, किसी स्थान पर बिलर्डंग का प्रबन्ध करने के लिए, द्विआयामी तय त्रिआयामी ड्राइंग तैयार करने में कम्प्यूटर का प्रयोग होता है।
(iii) इण्डस्ट्रियल इन्जिनियरिंग मे
यह उपकरणो के एकीकृत सिस्टमों को डिजाइन करने, कार्यान्वित करने तथा सुधार करने के काम आता है।
(iv) IC डिजाइन
CAD सिस्टम की सहायता से IC (इन्टिग्रेटिड सर्किट) को केवल तैयार व चैक ही नही किया जाता बल्कि LSI (लार्ज स्केल इन्टिग्रटिड) व VLSI (वैरी लार्ज स्केल) चिप भी डिजाइन व टैस्ट की जा सकती है।
8.मिलिट्री में कम्प्यूटर का प्रयोग (Computer in Military)
देश की रक्षा के क्षेत्र में कम्प्यूटर का विस्तृत प्रयोग किया जाता है। आधुनिक टैंक, मिसाईल, हथियार इत्यादि कम्प्यूटराईजड कन्ट्रोल सिस्टम का प्रयोग करते है। कुछ सैन्य क्षेत्र जिनमें कम्प्यूटर का प्रयोग सफलतापूर्वक किया जाता है। निम्न है।
(1) मिसाइल नियन्त्रण में
(2) सैन्य संचार प्रणाली में
(3) सैम्य आपरेशन और नियोजन में
(4) स्मार्ट हथियारो में।
संचार के सापनो में (Computer in Communication)
कम्यूनिकेशन का अर्थ है कि किसी सन्देश, विचार, तस्वीर, या भाषण को उस आदमी के द्वारा ग्रहण करना व साफ-समझना जिसके लिए यह तैयार किया गया है। इस वर्ग में मुख्य क्षेत्र निम्नलिखित है।
ई मेल (E-mail)
विडियो कान्केंसिंग (Video-conferencing)
बैटिंग (Chatting)
टेलीभेट (Telnet)
यूजनेट (Usenet)
एफ टी. पी. इत्यादि (FTP)
10.सरकारी कार्यों के लिए कम्प्यूटर का प्रयोग (Computers for use of Government Applications)
कम्प्यूटर ने अपनी शक्ति एवं जल्द निर्णय लेने की सामर्थ्य की वजह से सरकारी संगठनो को जीत लिया है। आज देश के सभी जिले NIC (नेशनल इन्फोरमेटिक सेन्टर) के माध्यम से एक केन्द्रीय कम्प्यूटर नेटवर्किंग से जुडे हुए है।
NIC जो कि स्वर्गीय प्रधानमन्त्री राजीव गान्धी द्वारा शुरु की गई थी जे देश के विभिन्न भांगो में नवीनतम जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण भाग निम्न है।
ड्राईविंग लाइसेन्स प्रणाली का कम्प्यूटराजेशन करना
मतदाता सूचि का कम्प्यूटराइजेशन करना।
मौसम सम्बन्धी भविष्यवाणी करना
पुरुष नारी अनुपात ज्ञात करना
बजट तैयार करना
आयकर विभाग में
बिक्रीकर विभाग में
PAN का कम्प्यूटरीकरण
न्याय और कानून के क्षेत्र में कम्प्यूटर का प्रयोग।
खेलो मे
कम्प्यूटर के घटक [Components of a Computer]
कम्प्यूटर के तीन प्रमुख हिस्से है।
इनपुट यूनिट (Input Unit)
सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit)
मेमोरी यूनिट (Memory Unit)
अर्थमैटिक एवं लॉजिक यूनिट [Arithmetic & Logical
Unit (ALU))
कन्ट्रोल यूनिट (Control Unit)
3. आउटपुट यूनिट (Output Unit)
सभी इकाईयो को सामान्यतः इसी क्रम में जोड़ा जाता है जैसे कि नीचे चित्र में दर्शाया गया है।
इनपुट यूनिट [ Input Unit]
इस यूनिट में वह उपकरण होते है जिनके माध्यम से कम्प्यूटर को सूचनाएँ एवं निर्देश इनपुट (Input) किये जाते हैं। ये इकाई कम्प्यूटर और यूजर (User) को जोड़ने का काम करती है। इनपुट (Input) उपकरण मानयो की भाषा को कम्प्यूटर द्वारा समझी जाने वाली मशीनी भाषा में बदल देते हैं।
इनपुट उपकरणों के उदाहरण: (1) की-बोर्ड (Keyboard) (ii) मॉनिटर (Monitor) (i) माउन्स (Mouse) (iv) लाईट पेन (Light Pen) (v) स्कैनर (Scanner) (vi) जॉयस्टिक (joy stick) (vii) वाईस रिकगनाइजर (Voice recongniser) (viii) कार्ड वाचक (Card reader) (ix) डिजीटाईजर (Digitizer) (x) पलाधी द्वाईव (Floppy Drive) (xi) डिस्क ड्राइव (Disk Drive) (xii) टेप ड्राइव (Tape Drive) (xiii) कार्टरिज टेप ड्राइव (Cartridge tape drive) (xiv) आंटीकल कैरेक्टर रीडर (Optical character Reader) (xv) optical मार्क रीडर (Optical Mark Reader)
टिप्पणीः संक्षेप में इनपुट यूनिट के कार्य इस प्रकार है।
यह यूजर (User) से डाटा (Data) स्वीकार करती है।
यह डाटा व निर्देशों को कम्प्यूटर की भाषा में बदलती है।
यह यूनिट यूजर को कम्प्यूटर से जोड़ती है।
आंउटपुट यूनिट [output Unit]
इस इकाई में यह उपकरण होते है जिनके माध्यम से हम कम्प्यूटर से परिणाम जान पाते है। आउटपुट यूनिट कम्प्यूटर और उपयोगकर्ता (यूजर) के बीच में माध्यम का कार्य करती है। आउटपुट उपकरण कम्प्यूटर की मशीनी भाषा के परिणामो को यूजर (User) की भाषा में बदलते है।
आउटपुट उपकरणो के उदाहरण ।
(1) मानीटर (Monitor) (i) लाईन प्रिंटर (Line Printer) (i) हॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (Dot Matrix printer) (iv) लेजर प्रिंटर (Laser Printer) (v) ग्राफ प्लॉटर (Graph plotter) (vi) फ्लॉपी ड्राइव (Floppy Drive) (vii) टेप ड्राइव (Tape Drive) (vii) डिस्क ड्राइव (Disk Drive) आदि
टिप्पणीः
संक्षेप में, आउटपुट यूनिट के कार्य इस प्रकार है।
यह यूनिट कम्प्यूटर द्वारा प्रोसेसर परिणामों को दिखाती है।
यह यूनिट परिणामों को यूजर (User) की भाषा में बदलती है।
यह यूनिट कम्प्यूटर को यूजर (User) से जोड़ती है।
सेन्ट्रल प्रोसेसिंग [Central Processing Unit (CPU)]
CPU को कम्प्यूटर का दिमाग जाना जाता है। CPU डाय व परिणामों और हिदायतो (प्रोग्राम) को स्टोर करता है। यह करूप्यूटर यूटर के सभी भागों को नियन्त्रित करता है। CPU के तीन हिस्से (Component) है।
अर्थमैटिक एवं लॉजिक यूनिट [Arithmetic & Logic Unit (ALU)]
इस इकाई को दो भागो में बार्टी जा सकता है।
(1) अर्थमैटिक यूनिट (2) लॉजिक यूनिट
(a) अर्थमैटिक यूनिट (Arithmetic Unit): इस यूनिट का मुख्य कार्य गणितीय कार्य जैसे जोड़, घटा, गुणा, भाग करना है। सभी मुश्किल गणनाएँ भी ऊपर लिखे गए कार्यों के बार- 2 इस्तेमाल से पूरी की जाती है।
(b) लॉजिक यूनिट का मुख्य कार्य, तार्किक कार्य को (Logical Unit): इस यूनिट पूरा करना है। जैसे कि दो संख्याओं की तुलना करना, डाटा का selection कार्य करना, डाटा को इकट्ठा करना, डाटा को मिलाना आदि कार्य करता
टिप्पणीः
संक्षेप में, Control Unit के कार्य इस प्रकार है।
यह कम्प्यूटर की बाकि ईकाईयों के बीच में डाटा और निर्देशों के आदान प्रदान के | नियंत्रण के लिए जिम्मेवार है।
ये कम्प्यूटर की सभी इकाईयों में संतुलन और नियंत्रण बनाए रखती है।
ये मेमोरी से निर्देश का लेती है। उनका विशलेषण करने कम्प्यूटर को वह कार्य करने के लिए निर्देश देती है।
यह इनपूट आउटपुट को डाटा मेमोरी में भेजने का निर्देश देती है।
ये डाटा को संग्रह या संसाधित (Store or process) नही करती।
मेमोरी या स्टोरेज यूनिट [Memory or Storage Unit]
यह यूनिट निर्देशो (Information), अय और मध्यवर्ती परिणामों को संग्रहित करती है। यह इकाई कम्प्यूटर की बाकी इकाईयों को जरूरत के वक्त सूचना प्रदान करती है।
इसे आंतरिक मेमोरी या मुख्य मेमोरी या प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) या रेण्डम एक्सेस मेमोरी (Random Access Memory) भी कहा जाता है। इसका आकार (size) कम्प्यूटर की गति, क्षमता और ताकत को प्रभावित करता है।
कम्प्यूटर में दो तरह की मेमोरी होती है। एक प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) और दूसरी द्वितीयक मेमोरी (Secondery Memory)। प्राथमिक मेमोरी temporary संग्रह करती है। जबकि द्वितीयक मेमोरी Permanent संग्रह करती है।
इनपुट उपकरण (Input Devices) जैसे कीबोर्ड, माउस आदि आऊटपुट उपकरण (Output device) जैसे प्रिन्टर, प्लॉटर आदि द्वितीय स्टोरेज (Secondary device) जैसे फ्लौपी, हार्डडिस्क, सी.डी., डी.वी.डी इत्यादि।
सॉफ्टवेयर: सॉफ्टवेयर program का एक समूह है, जिन्हे डिजाईन किया गया है। सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर प्रणाली के एकीकरण और प्रबन्धन और विशेष कार्यों को पूरा करने के हार्डवेयर अंशभूतों को नियन्त्रण, लिए उत्तरदायी है। दूसरे शब्दों में सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर को यह बताता है कि क्या करना है और कैसे करना है।
उदाहरण :
(i) वेतन नामावती सॉफ्टवेयर (Payroll software) का प्रयोग किसी संगठन में कर्मचारियों के वेतन की गणना करने के लिए किया जाता है।
(ii) कालेज आटोमेशन सॉफ्टवेयर (College automation software) विद्यार्थी के विवरण और फीस की गणना करता है। एक ऐसा प्रोग्राम है, जिसकी सहायता से आप आसानी से साफ तथा सुंदर डॉक्यूमेंट झटपट तैयार कर सकते हैं।
हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर मे सम्बन्ध [Relationship between Hardware and Software]
हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर एक दूसरे पर आश्रित है। दोनों ही कम्प्यूटर से लाभदायक आउटपूट (Output) प्राप्त करने के लिए इकट्टे काम करते हैं। कम्प्यूटर पर किसी कार्य विशेष को करने के लिए, हार्डवेयर में सम्बन्धित सॉफ्टवेयर को लोड करना चाहिए।
हार्डवेयर एक बार होने वाला व्यय है जबकि सॉफ्टवेयर का विकास बहुत महंगा है। यह एक निरन्तर व्यय है। विभिन्न कार्यों को चलाने के लिए हार्डवेयर पर विभिन्न सॉफ्टवेयर लोड किये जा सकते है।
सॉफ्टवेयर, यूजर (User) और हार्डवेयर के बीच एक माध्यम का कार्य करता है जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।
इस प्रकार हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर एक विशेष सम्बन्ध को दर्शाता है। यदि हार्डवेयर कम्प्यूटर प्रणाली का दिल है तो सॉफ्टवेयर इसकी आत्मा है। दोनों एक दूसरे के पूरक है।
टिप्पणीः
हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर एक दूसरे पर निर्भर है।
कम्प्यूटर पर विशेष कार्य विशेष करने के लिए, हार्डवेयर में सम्बन्धित संफ्टिवेयर को लोड करना चाहिए।
विभिन्न कार्यों को करने के लिए एक ही हार्डवेयर में विभिन्न सॉफ्टवेयर लोड किये जा सकते है।
हार्डवेयर सामान्यत एक बार होने वाला व्यय है (उपग्रेडेशन को जेडकर) जबकि सॉफ्टवेयर एक निरन्तर व्यय है।
सॉफ्टवेयर के प्रकार [Types of Software]
सॉफ्टवेयर दो प्रकार के है।
(क) सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)
(ख) एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software)
सिस्टम सॉफ्टवेयर [System Software]
सिस्टम सॉफ्टवेयर प्रोग्रामों का एक सग्रहण है जिसे स्वयं कम्प्यूटर के संचालन, नियन्त्रण और कम्प्यूटर की कार्य करने की शक्ति को बढ़ाने के लिए डिजाईन किया गया है। सिस्टम सॉफ्टवेयर आमतौर पर कम्प्यूटर निर्माताओं द्वारा तैयार किये जाते है।
सिस्टम सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर प्रणाली की इसके उचित कार्य सम्पादन के लिए एक मूल आवश्यकता है। सिस्टम सॉफ्टवेयर हार्डवेयर और यूजर (user) के बीच एक माध्यम है।
सिस्टम सॉफ्टवेयर हार्डवेयर पर केवल नियन्त्रण ही नहीं करते अपितु इसमें दूसरे कार्यक्रमों (प्रोग्राम) को चलाने में एक मंच प्रदान करते है।
Operating System, Compilers, Interpreter, Assemblers, Utility programs इत्यादि सिस्टम सॉफ्टवेयर के कुछ उदाहरण है।
सिस्टम सॉफ्टवेयर की विशेषताएँ:
1. सिस्टम के नजदीक
2. तेज गति
3. सामान्तः मशीनी भाषा में लिखे जाने वाले
4. आकार (size) में छोटे
5. डिजाईन करने में कठिन
6. समझने में कठिन
एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर [Application Software]
एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर वे सॉफ्टवेयर है जिन्हें एक विशेष आवस्यकता की पूर्ति के लिए डिजाईन किया गया है। हमारे द्वारा कम्प्यूटर प्रयोगशाला में तैयार किये गये सभी सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के वर्ग में आते है।
वेतन चिडा सॉफ्टवेयर (Payroll software), विद्यार्थी रिकार्ड सॉफ्टवेयर (Student record software), इन्वेटरी नियन्त्रण सॉफ्टवेयर (Inventory Control Software), रेलवे आरंक्षण सॉफ्टवेयर (Railway reservation software), आयकर सॉफ्टवेयर (Income tax software), वर्ड प्रोसैसर (Word Processor), स्प्रेडशीट (Spreadsheet) इत्यादि सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के उदाहरण है।
Application Software की विशेषताएं:
1. यह यूजर के समीप है।
2. इसकी गति धीमी है।
3. यह सामान्तया, उच्च स्तर भाषा (High level language) में लिखा होता है।
4. यह समझने में आसान है।
5. इसका प्रबन्ध और उपयोग आसान है।
6. यह आकार में बड़ा होता है। इसके लिए अधिक स्थान की आवश्यकता होती है।
7. इसे डिजाईन करना आसन है।
एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और सिस्टम सॉफ्टवेयर में अन्तर [Application Software and System Software]
1. यह यूजर ऑरयन्टिड (User Oriented) है।
2. इसकी गति कम है।
3. यह अधिक मेलजोल (More interactive) वाला है।
4. यह समझने में आसान है।
5. इस प्रबन्ध करना आसान है।
6. यह उच्च स्तर भाषा (High level language) मे बनाया जाता है।
7. इसे डिजाइन करना आसान है।
8. यह आकार में बड़ा है।
9. पे स्केल, लाईब्रेरी, रेलवे रिर्जवेशन इत्यादि 9 इसके उदाहरण है।
मेमोरी के प्रकार (Types of Memories)
मेमोरी तीन प्रकार की है।
1. आन्तरिक प्रौसेसर मेमोरी (Internal Processor Memory)
2. प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory)
3. द्वितीय मेमोरी (Secondary Memory)
(क) आन्तरिक प्रोसेसर मेमोरी यह मेमोरी CPU में रखी होती है। 'Internal Memory' में आमतौर पर 'Cache Memory' और विशेष रजिस्टर होते हैं जिनमें प्रौसेसर सीधे पहुँच सकता है।
इस memory का प्रयोग CPU मे किये जा रहे वर्तमान कार्य के डाटा और प्रोग्राम को बोडे समय के लिए स्टोर करने के लिए किया जाता है। 'Processor Memory' सभी 'Memories' में से अधिक तीव्र है परन्तु यह अधिक मंहगी है।
(ख) प्राथमिक या प्राइमरी (Primary) मेमोरी यह मेमोरी अस्थायी (temporary) है। जब डाटा को Process किया जा रहा होता है तो आप Primary Memory में data स्टोर कर सकते है।
'Primary memory' को 'Main memory' के नाम से भी जाना जाता है। Secondary memory से लगभग सौ गुणा तीव्र है।
Main memory वह स्थान है जहाँ कम्पूटर अल्प काल के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम, एप्लीकेशन साफ्टवेयर और वर्तमान data को स्टोर करता है ताकि CPU उन तक शीघ्रता और आसानी से पहुँच सके।
यह मेमोरी अस्थाई (volatile) होती है अर्थात जब बिजली बन्द कर दी जाती है तो इस मेमोरी का डाटा खत्म हो जाता है।
यह मेमोरी बहुत से छोटे-छोटे भागों में बंटी हुई है। प्रत्येक भाग को शेल (cell) या 'Memory location' कहते है। इनमें से प्रत्येक शेल को एक अद्वितीय संख्या (Unique number) दी जाती है जिसे 'Address' कहते है।
(ग) द्वितीय (Secondary) मेमोरी
इसे "Auxilliary memory" या "Backing storage" भी कहते है। द्वितीय मेमोरी का आकार प्रथम मेमोरी से बढ़ा होता है परन्तु यह प्रथम मेमोरी से धीमी है। यह सामान्यता System Program, Instruction और डाय फाईल को स्टोर करता है।
द्वितीय मेमोरी के लाभ :
1. अपरिवर्तनशील या स्थाई (Non-Volatility): जब बिजली चली जाती है तो इसकी विषय सूची खत्म या नष्ट नहीं होती।
2. समता (Capacity): इस मेमोरी में बहुत बड़े डाटा को स्टोर कर सकता है। (कागज से भरे हुए कमरे के बराबर)।
3. मूल्य (Cost) : टेप या डिस्क का मूल्य कम है।
4. पुनः उपयोगिता (Reusability): डाटा "Secondary Storage में तब तक रहता है जब तक इसे यूजर द्वारा इसे खत्म न दिया जाए।
5. पोरटेबिल्टी (Portability): आधुनिक समय की भण्डारण युक्तियां जैसे CD-ROMS इतनी छोटी है कि उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जा सकता है।
6. विश्वस्नीयता (Reliability): 'Secondary storage' में डाटा सुरक्षित होता है क्योंकि "Secondary Storage" भौतिक रुप से विश्वसनीय होते है।
7. सुविधाजनक (Convenience): कम्प्यूटर सहायता से अधिकृत लोग डाटा को ढूंढ सकते है ,और शीघ्रता से उन तक पहुँच सकते है। हार्ड डिस्क, चुम्बकीय टेप, CD-ROM, DVD इत्यादि उपकरण द्वितीय मेमोरी में शामिल है।
प्राथमिक और द्वित्तीय मेमोरी में अन्तर [Difference between Primary & Secondary Memory]
प्राथमिक मेमोरी
1. यह अस्थायी है।
2. यह परिवर्तनीय (Volatile) है।
3. यह CPU में निर्मित है।
4. यह तीव्र है।
5. इसकी सीमित क्षमता है।
6. इसकी कीमत अधिक है।
7. इसकी पहुंच गति (access speed) उच्च है।
द्वितीय (सेकेंडरी) मेमोरी
1. यह स्थायी है।
2. यह अपरिवर्तनीय (Non-Volatile) है।
3. यह एक अलग यूनिट में होता है।
4. यह धीमा है।
5. इसकी क्षमता अधिक है।
6. इसकी कीमत कम है।
7. इसकी पहुंच गति (access speed) धीमी है
स्टोरेज लोकेशन की क्षमता को समझने से पहले हम बिट, निबल, बाईट और कम्प्यूटर वर्ड को समझते हैं।
(a) बीट (Binary Digit) एक ० या 1 को बिट (BIT) कहते है।
(b) निबल (Nibble)चार बिट के समूह को निबल कहते है।
(c) बाईट (Byte)
आठ बिट के समूह को बाईट कहते है। बाईट वो सबसे छोटी इकाई है जो कि किसी डाटा आईटम या कैरेक्टर को दर्शाती है।
(d) कुछ उच्च संग्रहण इकाईया (Few higher storage units are):
(i) किलोबाईट (KB): 1KB = 1024 बाईट
(ii) मेगाबाईट (MB): 1MB 1024 किलोबाईट
(iii) गीगाबाईट (GB): 1GB = 1024 मेगाबाईट
(iv) टेराबाईट (TB): 1TB = 1024 गीगाबाईट
(v) पेटाबाईट (PB): 1PB = 1024 टेराबाईट
कम्प्यूटर वर्ड (Computer Word)
कम्प्यूटर वर्ड बाईट की तरह, निश्चित संख्या की बिट का समूह है जिसे एक इकाई के रूप में प्रोसेस किया जाता है कम्प्यूटर वर्ड के साईज को वर्ड-साईज या वर्ड लैंथ कहा जाता है। ये कम से कम 8 बिट का और ज्यादा से ज्यादा 96 बिट का होता है।
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